हरा भरा वन भाता है क्यों ? खिला सुमन मुरझाता है क्यों ? जीवन एक क्रम है सबको नाच नचाता है क्यों ?
Friday, 18 December 2015
मारीच का झूठा क्रन्दन, रावण सीता का हरण कर लेता युधिष्ठिर का एक झूठ सत्य में परिवर्तित हो द्रोण का वध करवा देता है महत्वकांछी झूठ का सहारा ले प्रगति कर रहे है , और सत्य ? झूठ के बोझ तले कराहता रहा है, कराह रहा है और कराहता रहेगा |